
Covid-19
वाराणसी: मंडुवाडीह स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में पांच घंटे उपचार के बाद भी नहीं बच सका मरीज।
वाराणसी। कोरोना काल में निजी अस्पताल उपचार के नाम मरीजों से दोहन कर रहे हैं। पहले तो बेड नहीं होने का बहाना बनाकर मरीजों को वापस कर रहे हैं। यदि किसी मरीज को भर्ती कर लिया तो इतना बिल बना थमा दे रहे हैं कि मरीज के परिजनों के पैरो तले जमीन खिसक जा रही है। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को सामने आया। मंडुवाडीह स्थित एक अस्पताल में पांच घंटे उपचार करने का बीस हजार रुपये बिल बना दिया। हालांकि उस मरीज को अस्पताल प्रबंधन बचा नहीं पाया।
जानकारी के अनुसार संजय कुमार ने अपने एक रिश्तेदार को शाम लगभग सात बजे तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया था। चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने अस्पताल स्टाफ को मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करने को कहा था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संजय ने आरोप लगाया कि घंटों दौड़ भाग के बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया।
इससे उसकी हालात बिगड़ चलती और उसने दम तोड़ दिया। थोड़ी देर बाद मरीज के परिजन बिल पेमेंट करने पहुंचे तो उनके सामने बीस हजार रुपये का बिल रख दिया। बिल देख कर परिजनों के होश उड़ गए और हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि एक तो मरीज का सही इलाज नहीं किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। ऊपर से बीस हजार रुपये का बिल बना दिया।