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UP: 22 साल बाद भी नहीं सूखे आंसू, लालमणि ने पाकिस्तानी सैनिकों को चटाई थी धूल
प्रयागराज. करगिल युद्ध (Kargil War) में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में भारत की विजय के 22 पूरे साल होने जा रहे हैं. इस लड़ाई में प्रयागराज (Prayagraj) के लालमणि यादव भी शहीद हुए थे. कुमाऊं रेजीमेंट में नायक रहे लालमणि ने 13 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा था. शहीद लालमणि की पत्नी और चारों बच्चे अब भी एक पल के लिए लालमणि को भूल नहीं पाते हैं. शहीद लालमणि के परिवार को उनकी शहादत पर गर्व तो है लेकिन 22 साल पहले मिले सदमे से वह अभी तक उबर नहीं पाया है.
शहीद लालमणि के दोनों बेटे भी पिता की तरह फौज में जाकर देश की खातिर लड़ना चाहते थे, लेकिन अपना सुहाग खो चुकी उनकी मां डर की वजह से उन्हें सेना में भेजने को राजी नहीं हुई. शहीद की पत्नी संतोष यादव का कहना है कि आज भी देश की सीमाओं पर जब तनाव बढ़ता है और कोई सैनिक शहीद होता है तो उनको कारगिल की घटना याद आ जाती है. गलवान घाटी में भी चीनी सैनिकों के साथ हुए तनाव के बाद भी उन्हें किसी बड़ी अनहोनी की आशंका सताने लगी थी.
कारगिल शहीद लालमणि यादव शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर करछना इलाके के पतुलखी गांव के रहने वाले थे. कारगिल की लड़ाई से पहले वह दो महीने पत्नी संतोष देवी व चारों बच्चों के साथ बिताकर यहां से गए थे. उनके दो बेटे व दो बेटियां हैं. लालमणि यादव में देशभक्ति का जज़्बा कूट कूटकर भरा हुआ था. कारगिल की लड़ाई में उन्होंने अपनी बहादुरी व चालाकी से दुश्मन के 13 सैनिकों को मौत के घाट उतारा था. पाकिस्तान की तरफ से की गई बमबारी में वह शहीद हो गए थे. शहादत के बाद सरकार ने परिवार को आर्थिक मदद दी, जिसके चलते चारों बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर सके. बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी आयुष डॉक्टर है. दो बेटों में एक बेटा एमबीए कर चका है तो दूसरा वकालत कर पेट्रोल पंप और डिग्री कॉलेज का संचालन कर रहा है.
संतोष देवी के मुताबिक 1985 में उनकी शादी हुई थी जबकि 1999 में हुए कारगिल युद्ध में उनके पति शहीद हो गए थे. इसके बाद उन पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा. लेकिन उन्होंने हौसला बनाए रखा और बच्चों को अच्छी तालीम दिलाई. परिवार को लालमणि की शहादत पर गर्व तो है, लेकिन परिवार उन्हें एक पल के लिए भी इन 22 वर्षों में भूल नहीं पाया है.