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यूपी: बरेली में ठगी का पुलिसिया अंदाज सुनकर दंग रह गए पुलिस अफसर।

यूपी: बरेली में ठगी का पुलिसिया अंदाज सुनकर दंग रह गए पुलिस अफसर।


बरेली। नेपाल के जरिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में तीन साल से ठगी करने वाले गैंग ने पुलिस के सामने कई राज खोले। इनमें गैंग के सरगना सहित साथी आरोपितों ने वारदात को अंजाम देने का जो पुलिसिया अंदाज बताया उससे पुलिस अफसर भी दंग रह गए। अपने शिकार को पकड़ने के बाद गिराेह उसे अपनी गतिविधियों के जरिए इस बात का अहसास करा देता था कि वह असली एटीएस है। इसके लिए उनके पास पिस्टल से लेकर हर वो चीज होती है जो सामान्यत: पुलिस के पास मिलती है। 

पुलिस की मानें तो गिरोह इतने शातिराना अंदाज में वारदात को अंजाम देता था कि असली पुलिस कर्मी भी एक बारगी चकमा खा जाए। इतना नहीं गिरोह दबिश के दौरान अपने ही साथी को पीटने से नहीं चूकता था।जिससे किसी को शक न हो। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि दबिश देने वालों में शामिल मुख्य आरक्षी बृजेश सिंह, शरीफ, इकबाल, अहिबाब उर्फ मुन्ना व इरशाद सभी पिस्टल लेकर चलते थे। दबिश के समय गाड़ी से सबसे पहले वर्दी पहने बृजेश सिंह, शरीफ व इकबाल उतरते थे। इसके बाद सादे कपड़ों में अहिबाब उर्फ मुन्ना व इरशाद उतरते। वर्दी पहने तीनों अपने ही एक साथी को उठाने का नाटक करते। 

इसके बाद सादे कपड़े पहने दोनों आरोपित युवक को अपनी गाड़ी में बैठा चल देते। अब सवाल है कि ठगों के पास पिस्टल कहां से आई। एसओजी की टीम ठगों के पास से अभी पिस्टल भी बरामद नहीं कर सकी है।
बता दें कि जांच में अब तक सामने आया है कि शास्त्रीनगर के सर्राफ सुभाषचंद्र गंगवार से पहले ठगों ने बहेड़ी के सर्राफ को निशाना बनाया। इससे पहले ठग मेरठ व मुरादाबाद के सर्राफ से भी ठगी कर चुके हैं। मेरठ व मुरादाबाद में ठग ने किस सर्राफ से ठगी की, उनके नाम अभी नहीं कबूले हैं। एसओजी पूछताछ में जुटी हुई है। आशंका है कि सरगना चंद्रपाल का गिरोह अलग-अलग टोली में सर्राफ व व्यापारी को ठगने में जुटा है।

मुख्य आरक्षी बृजेश सिंह विभाग में गुरुजी के नाम से जाना जाता है। कहता है कि मेरे तैयार किये कई चेले अफसर हैं। खुद को निर्दोष बताते हुए कहता है कि मुझे जान-बूझकर मो. इकबाल उर्फ पप्पू ने फंसाया है। हमारा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। बृजेश सुभाषनगर के रवींद्र नगर में परिवार संग रहता है। उसका बड़ा बेटा डाक्टर है। सुभाषनगर में ही वह प्रैक्टिस करता है।

दबिश में ठग किसी अन्य को नहीं उठाते थे। वह उनके बीच का ही एक आदमी होता था। दबिश को लेकर किसी को कोई शक न हो लिहाजा, दबिश देने वाले टीम के सदस्य अपने ही साथी को दबिश के दौरान जमकर पीटते। वह माफी मांगने की बात कहने लगता। इसी के बाद पूछताछ के लिए उसे उठाने की बात कह फर्जी एटीएस उसे उठा लाती। सौदा करने वाले व्यक्ति को शक न हो। लिहाजा, उसे थाने पहुंच कर शिकायत करने की बात कहता। कार्रवाई में फंसने का डर होने के चलते सर्राफ थाने ही नहीं पहुंचता। इसी का ठगों ने जमकर फायदा उठाया।