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होटल या रेस्टोरेंट का बिजनेस करते हैं तो जान लें GST का नियम, बाद में न भरना पड़े जुर्माना

होटल या रेस्टोरेंट का बिजनेस करते हैं तो जान लें GST का नियम, बाद में न भरना पड़े जुर्माना

बिजनेस डेस्क ।अगर आप होटल या रेस्टोरेंट चलाते हैं तो उसके माल एवं सेवाकर (GST) का नियम जानना जरूरी है. आपको जानना होगा कि कमाई के हिसाब से कितना टैक्स देना होगा. इसमें कोई ढिलाई करते हैं तो टैक्स विभाग को भारी जुर्माना चुकाना पड़ सकता है. हो सकता है कि आपके खिलाफ दंडात्मकम कार्रवाई भी हो जाए. होटल या रेस्टोरेंट का कारोबार है तो उसमें भी ध्यान रखना है कि कितने की कमाई होती है और उसका जीएसटी का नियम क्या होगा.

मान लें कोई हाइवे किनारे होटल चलाता है जिसमें कोई कमरा 500 से लेकर 1000 रुपये तक का है. उस व्यवसायी का सालाना टर्नओवर 20 लाख का है तो उसका जीएसटी का क्या नियम होगा. क्या इस स्थिति में जीएसटी भरना जरूरी है या नहीं? नियम के मुताबिक अगर होटल या रेस्टोरेंट में व्यवसायी का टर्नओवर 20 लाख से कम है तो जीएसटी नंबर लेने की जरूरत नहीं है. यह नियम उनके लिए ही होता है जिनकी सालाना कमाई 20 लाख रुपये से ज्यादा होती है. ऐसे व्यवसायियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है. अगर कमाई 20 लाख से नीचे है तो टैक्स लगाने की जरूरत नहीं है.

अगर आप 20 लाख से ऊपर जाते हैं तो उसमें जीएसटी के रेट फिक्स है. रेट के हिसाब से ही जीएसटी की गणना होती है और उसे चुकाना भी होता है. जीएसटी में एक बात ध्यान रखें कि डिस्काउंट के बिना वाले ऑनलाइन रेट ही मान्य होंगे. यानी कि आपने होटल का चार्ज 1000 रुपये रखा है, ऑनलाइन यही रेट आप ग्राहकों के लिए दिखा रहे हैं लेकिन डिस्काउंट के बाद 500 रुपये में दे रहे हैं. इस स्थिति में आपको जीएसटी 1000 रुपये के हिसाब से ही दिखाना होगा. 1000 रुपये तक के रूम पर कोई जीएसटी नहीं लगता, इसलिए जीएसटी नहीं भर सकते. अगर 1000 रुपये से 7500 रुपये तक का रूम है तो उस पर 12 परसेंट और 7500 से ऊपर के कमरे पर 18 परसेंट जीएसटी भरना होगा.


इस साल फरवरी में होटल और रेस्टोरेंट के बिल पर जीएसटी का मामला संसद में भी उठा था. मीडिया में ऐसी बात आई थी कि सरकार जीएसटी रेट को घटा सकती है लेकिन सरकार ने इससे इनकार कर दिया. पर्यटन मंत्रालय ने कुछ कटौती को लेकर वित्त मंत्रालय से सामने अपना अनुरोध रखा था ताकि कोरोना काल में होलट-रेस्टोरेंट के व्यवसाय को चालू रखा जा सके. हालांकि दो साल पहले सरकार ने एक बड़े कदम के तहत जीएसटी दरों में कटौती का ऐलान किया था. इसे होटल और पर्यटन क्षेत्र के विकास के तौर पर देखा गया.

जीएसटी परिषद् ने 1000 रुपये किराये वाले होटलों पर जीएसटी शून्य कर दिया था जो अभी तक मान्य है. इसके बाद 1001 से 7500 रुपये तक के कमरों पर जीएसटी 12 परसेंट कर दिया जो पहले 18 परसेंट था. पहले 7500 रुपये से ऊपर के कमरों पर 28 परसेंट जीएसटी लगता था जिसे घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया