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सुप्रीम कोर्ट का सरकार से सवाल; EWS और OBC के लिए 8 लाख की एक समान आय सीमा कैसे तय की?
नई दिल्ली । मेडिकल टेस्ट नीट के ऑल इंडिया कोटा में ईडब्ल्यूएस कोटे में आरक्षण की सुविधा लेने के लिए लगाई गई शर्त आठ लाख रुपये की वार्षिक आय पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने सरकार से कहा कि आठ लाख रुपये की इस आय सीमा का आधार भी है या सरकार ने यूं ही हवा में से उठाकर ये मानदंड बना दिया। कोर्ट ने पूछा ओबीसी को ईडब्ल्यूएस के साथ कैसे रखा जा सकता है?
कोर्ट ने कहा कि आपके पास जनसांख्यिकीय, सामाजिक और सामाजिक आर्थिक डाटा होगा। आपने आठ लाख रुपये की आय सीमा कैसे तय की?, आप गैर बराबर को बराबर कर रहे हैं। ओबीसी में जिनकी आय आठ लाख रुपये से कम है वह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं, लेकिन संवैधानिक योजना में ईडब्ल्यूएस शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि वह मानते हैं कि ईडब्ल्यूएस सरकार का नीतिगत मामला है, लेकिन कोर्ट को यह जानने का अधिकार है कि सरकार आठ लाख रुपये की सीमा के इस निर्णय पर कैसी पहुंची? एक मौका ऐसा भी आया जब कोर्ट इस अधिसूचना को स्थगित करने जा रहा था, लेकिन एएसजी ने आग्रह किया सरकार इस बारे में आंकड़े पेश करेगी और दो-तीन दिन में शपथ पत्र पेश कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी। अदालत ईडब्ल्यूएस श्रेणी को नीट के ऑल इंडिया कोटे में दस फीसदी और ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की अधिसूचना के खिलाफ नीट उम्मीदवारों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
- क्या सरकार ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी को निर्णित करने के लिए कोई अध्ययन किया था?
- यदि हां, तो क्या सिन्हो आयोग के मानकों के आधार पर यह तय किया गया?
- क्या इस सीमा को तय करते समय शहरी और ग्रामीण खरीद शक्ति को ध्यान में रखा गया था?
- संपत्ति के अपवाद का निर्धारण करते समय क्या कोई अध्ययन किया गया था?
- आवासीय फ्लैटों का मानक पर मेट्रो शहरों और गैर मेट्रो शहरों में अंतर क्यों नहीं किया गया?
अदालत ने कहा कि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के लिए आठ लाख रुपये की आय सीमा एक ही है, लेकिन ओबीसी में आठ लाख रुपये से ज्यादा आय होने पर पिछड़ापन कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में क्या ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के लिए आठ लाख रुपये की आय सीमा रखना मनमाना नहीं होगा वह भी तब जब ईडब्ल्यूएस में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ेपन की कोई परिकल्पना नहीं है।