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वाराणसी : उन्नीस माह बाद मूल स्वरूप में लौटा सुबह ए बनारस

वाराणसी : उन्नीस माह बाद मूल स्वरूप में लौटा सुबह ए बनारस

वाराणसी । सुबह ए बनारस का आध्यात्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठान 19 महीने के लंबे अंतराल पर अपने मूल स्वरूप और स्थान पर लौटा। वर्ष 2020 में 25 मार्च को लॉकडाउन लगाए जाने के पहले से ही इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था।

न्यू अस्सी घाट पर गुरुवार को प्रातः काल सप्तऋषियों के प्रतीक सात बटुकों ने मां गंगा की आरती की। उससे पहले मातृ चेतना की प्रतीक पाणिनि कन्या महाविद्यालय की ऋषिकन्याओं ने संजीवनी के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया। मां गंगा को पुष्पंजलि तथा सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया। इनके उपरांत डॉ. रागिनी सरना ने प्रातः काल राग बैरागी भैरव में विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश ‘पूरब दिस भये अजोर प्रस्तुत की। मध्य एकताल में निबद्ध बंदिश ‘सामवेद सुर अधार से गायन को विस्तार देते हुए द्रुत एकताल में निबद्ध बंदिश ‘आओ गावो भयो प्रभात का सुमधुर गायन किया। समापन भावपूर्ण भजन ‘निर्धन के धन राम हमारे से किया। डॉ. रागिनी के साथ तबले पर डॉ संदीप राव केवले एवं हारमोनियम पर मानस परिडा ने संगत की। कलाकार को प्रमाणपत्र कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव एवं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने प्रदान किया।

इस अवसर पर संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा, डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, दीपक मिश्रा, पं. प्रमोद मिश्रा, रमेश तिवारी, मंजु मिश्रा, विनय तिवारी, उदय प्रताप सिंह, सुनील शुक्ला, जयप्रकाश, कृष्णमोहन, देवेंद्र आदि उपस्थित रहे ।