Headlines
Loading...
यूपी: चंदौली में किसानों के दो साल पहले के धान खरीद पर 10 लाख बकाया में, अब यूपी एग्रो पर दर्ज़ हुआ एफआइआर।

यूपी: चंदौली में किसानों के दो साल पहले के धान खरीद पर 10 लाख बकाया में, अब यूपी एग्रो पर दर्ज़ हुआ एफआइआर।


चंदौली। किसानों का दो साल पहले धान खरीद कर अभी तक भुगतान न करने पर क्रय एजेंसी यूपी एग्रो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। 16 किसानों का 10 लाख रुपये बकाया है। डीएम के निर्देश पर जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने सदर कोतवाली में तहरीर दी है। क्रय एजेंसी को तीन दिन का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि तक यदि भुगतान नहीं किया तो मुकदमा दर्ज होगा। वहीं इस बार की खरीद प्रक्रिया पर रोक लगेगी।

वहीं किसानों ने दो साल पहले यूपी एग्रो के क्रय केंद्र पर धान बेचा था। इसके बदले उन्हें पावती भी दी गई थी, लेकिन अब तक उनका पैसा नहीं मिला। किसान पावती लेकर जिला खाद्य व विपणन अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काटते रहे। परेशान किसानों ने पिछले दिनों जिलाधिकारी संजीव सिंह से मिलकर गुहार लगाई। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए डिप्टी आरएमओ को जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। 

वहीं दूसरी तरफ एजेंसी प्रभारी ने खरीद से इन्कार किया, जबकि किसानों की पावती के हिसाब से किसानों का 10 लाख बकाया की पुष्टि हुई। रिपोर्ट पर एजेंसी के जिला प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है। खाद्य व विपणन अधिकारी ने सदर कोतवाली में एजेंसी प्रभारी के खिलाफ तहरीर दी है। एजेंसी को तीन दिन का समय दिया गया है। यदि इतने दिनों में किसानों के बकाया 10 लाख का भुगतान नहीं हुआ तो एजेंसी के जिला प्रभारी पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। 

बता दें कि भुगतान के लिए भटक रहे किसानों ने एक दिन पहले जिला खाद्य व विपणन अधिकारी कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। कहा कि अधिकारियों की शह पर ही केंद्र व एजेंसी प्रभारी मनमानी करते हैं। ऐसे में अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनकी भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। 

वहीं दूसरी तरफ ताकि भविष्य में अन्य किसानों को इस तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। क्रय एजेंसी यूपी एग्रो पर किसानों का 10 लाख बकाया है। किसानों ने दो साल पहले अनाज बेचा था लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला। एजेंसी प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए सदर कोतवाली में तहरीर दी गई है। तीन दिन में भुगतान नहीं हुआ तो मुकदमा दर्ज होगा और खरीद प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा।