
National
असम राइफल्स के काफिले पर कायराना हमला, बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा- बोले पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
मणिपुर । चुराचांदपुर में शनिवार को हुए हमले में भारतीय सेना का एक कर्नल, उनकी पत्नी और आठ साल का बेटा और असम राइफल्स के चार जवान मारे गए. कर्नल विप्लव त्रिपाठी 46वीं असम राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर(सीओ) थे. अधिकारियों ने कहा कि देहेंग क्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर दूर घात लगाकर किए गए इस हमले में चार अन्य लोग घायल हो गए.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने ट्वीट कर कहा कि मणिपुर के चुराचांदपुर में असम राइफल्स के काफिले पर कायराना हमला बेहद दुखद और निंदनीय है. देश ने 46वीं असम राइफल्स के सीओ समेत पांच बहादुर सैनिकों और उनके परिवार के दो सदस्यों को खो दिया है. राजनाथ सिंह ने कहा कि शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं. दोषियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर में असम राइफल्स के काफिले पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मैं उन सैनिकों और परिवार के सदस्यों को श्रद्धांजलि देता हूं जो आज शहीद हुए हैं. उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं.
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (N Biren Singh) ने ट्वीट करते हुए घटना की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि 46 असम राइफल्स के काफिले पर हुए कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें आज सीसीपुर में सीओ और उनके परिवार समेत कुछ कर्मियों की मौत हो गई है. राज्य बल और अर्धसैनिक बल पहले से ही उग्रवादियों को पकड़ने का काम कर रहे हैं. दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा.
घटना चुराचंदपुर जिले के सिंगनगाट के सेहकेन गांव में शनिवार सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर हुई. आतंकियों की इस नापाक साजिश में 7 लोगों की मौत हो गई है. इस हमले के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को जिम्मेदार माना जा रहा है. इसका गठन साल 1978 में हुआ था, बाद में भारत सरकार ने इसे आतंकी संगठन घोषित कर दिया था. ये संगठन मणिपुर में भारतीय सुरक्षाबलों पर धोखे से हमले करने के लिए जाना जाता है. इसका गठन बिश्वेसर सिंह ने किया था. आतंकी संगठन पीएलए स्वतंत्र मणिपुर की मांग करता है.