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यूपी: वाराणसी रामनगर राल्हूपुर में प्रस्तावित फ्रेट विलेज भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन और किसानों की नहीं बनी बात।
वाराणसी। रामनगर के राल्हूपुर में प्रस्तावित फ्रेट विलेज के रास्ते की रुकावट बढ़ती ही जा रही है। गत दिनों पीडीडीयू तहसील में प्रशासन व किसानों की बात नहीं बनी। इससे एक बार फिर से फ्रेट विलेज पर अड़चन आती दिखाई दिख रही है। किसानों के जीविकोपार्जन का सर्वे करने के बाद डीएम चंदौली के समक्ष किसानों को अपना पक्ष रखने की समय सीमा निर्धारित की गई थी।
वहीं दूसरी तरफ़ जहां किसान राल्हुपुर में दिये गए मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। उधर प्रशासन चंदौली कुछ सर्किल दर से ही मुआवजा देने की बात पर अड़ा है। फिलहाल समहित से भूमि अधिग्रहण नहीं होने पर प्रशासन भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन लेने का मूड बना रहा है। कार्य को 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन 2021 भी बीतने वाला है और रुकावटें बढ़ती जा रही हैं।
वहीं भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित गंगा जलमार्ग वन बनारस से हल्दिया का प्रमुख केंद्र वाराणसी है। इससे जोड़कर देश का पहला फ्रेट विलेज बनाने की तैयारी शुरू की गई है। प्रस्तावित फ्रेट विलेज को 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए 100 एकड़ जमीन की जरूरत है लेकिन अब तक कुल 11 एकड़ जमीन ही मिली है। इसमें आठ एकड़ जमीन किसानों की है।
वहीं दूसरी तरफ़ शेष जमीन के लिए चंदौली के किसानों से वार्ता हो रही है। वहां के किसानों की मांग है कि अधिग्रहण के लिए जमीन का सर्किल रेट वाराणसी का लगाया जाए क्योंकि चंदौली की जमीनों का सर्किल रेट तुलनात्मक बहुत कम है। जबकि दोनों भूमि एक दूसरे से सटा हुआ है।
बता दें कि राल्हूपुर में 18 से 22 लाख रुपये बिस्वा जमीन ली गई है जबकि मिल्कीपुर के किसानों को चार लाख 75 हजार रुपये ही दिया जा रहा है। यह अनदेखी है। अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। फ्रेट विलेज 3000 करोड़ की लागत से रामनगर के राल्हूपुर में बने टर्मिनल से जोड़कर बनाया जा रहा है। फ्रेट विलेज में वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग रैपरिंग, कारगो स्टोरेज, रोड, रेल व जल ट्रांसपोर्ट सर्विस, शहरी जीवन की बुनियादी सुविधाएं, माल सुरक्षित रखने के लिए स्टोर, गंगा पार एक नया शहर बसेगा, हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।