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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक में एक आदेश जारी करते हुए कहा कि कोरोना से अनाथ बच्चों को सभी राज्य दें अब देंगी मुआवजा।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मौत पर मुआवजे की अदायगी में राज्यों की हीलाहवाली और देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए बुधवार को आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्य सचिवों को तलब कर लिया। वहीं कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को वर्चुअल सुनवाई के दौरान पेश होने का आदेश दिया और दोनों अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश पर पेश होकर सफाई पेश की। अधिकारियों ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन सुनिश्चित करेंगे और कोई कोताही नहीं बरतेंगे।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को जल्द से जल्द पात्र लोगों को मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया और कहा कि कोई भी दावा तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा। अगर दावा खारिज किया जाएगा तो संबंधित व्यक्ति को इसकी सूचना दी जाएगी ताकि वह तकनीकी कमियां दूर कर सके।
वहीं कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे कोरोना के दौरान माता-पिता को खोने वाले सभी बच्चों को, जिनका ब्योरा बाल स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध है, मुआवजे का भुगतान करें क्योंकि ये बच्चे मुआवजे के लिए अर्जी नहीं दाखिल कर पाएंगे।
वहीं जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कोरोना से मौत पर परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग वाली गौरव कुमार बंसल की याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को ये निर्देश दिए। सुबह जब सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कोरोना से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने का राज्यवार चार्ट पेश किया गया तो कोर्ट ने अभी तक राज्य सरकारों द्वारा सभी पात्र लोगों को मुआवजा नहीं दिए जाने पर गहरी नाराजगी जताई।
वहीं दूसरी तरफ़ आंध्र प्रदेश में मुआवजे के लिए आए कुल दावों की तुलना में भुगतान की स्थिति काफी कम दिखने पर कोर्ट नाराज हो गया। बिहार में भी मुआवजे के लिए आए दावों की संख्या कोरोना में दर्ज मौतों से कम देखकर पीठ ने कहा कि ये लोग कानून से ऊपर नहीं हैं। दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को कोर्ट ने दो बजे पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट मामले पर वर्चुअल सुनवाई कर रहा था। कोर्ट के आदेश पर आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्य सचिव दो बजे वर्चुअल सुनवाई में पेश हुए।
वहीं दूसरी तरफ़ आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा कि वह कोर्ट से माफी मांगते हैं और भरोसा दिलाते हैं कि कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह बहुत तनाव और शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं क्योंकि वह पहली बार सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए हैं और वह भी इस तरह। जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि उनकी चिंता सिर्फ इतनी है कि पात्रों को पैसा मिले। कोई भी दावा तकनीकी आधार पर खारिज न किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि उन्होंने सारे मामलों को रिव्यू करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट थोड़ा समय दे, सभी को मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा।
वहीं आंध्र के मुख्य सचिव और राज्य की तरफदारी करते हुए वरिष्ठ वकील बसंत ने राज्य में मुआवजे के भुगतान और दावों की ताजा स्थिति पेश की। बसंत ने कहा कि राज्य सरकार को मुआवजे के लिए कुल 41,292 दावे प्राप्त हुए हैं जिनमें से 34,819 दावों में पात्रता पाई गई और 23,835 लोगों को भुगतान कर दिया गया है। 5,141 दावों को मंजूरी दी गई है जिन्हें तीन दिन में भुगतान कर दिया जाएगा। बाकी के लिए कोर्ट दो सप्ताह का समय दे, सभी दावों की जांच करके भुगतान कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ़ सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप इस स्थिति और अंतिम क्षण का इंतजार क्यों करते रहते हैं। बाद में कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा दिए गए भरोसे को आदेश में दर्ज करते हुए कहा कि उम्मीद है उन्होंने जो कहा है, उसे पूरा करेंगे।
बता दें कि वहीं बिहार सरकार के मुख्य सचिव अमीर सुभानी भी वर्चुअल सुनवाई में पेश हुए हालांकि उनकी आवाज साफ सुनाई नहीं देने के कारण कोर्ट उन्हें सीधे तौर पर नहीं सुन सका। राज्य सरकार के वकील अभिनव मुखर्जी ने कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जा रहा है। बिहार सरकार कोरोना से मौत पर 4.5 लाख रुपये मुआवजा दे रही है। राज्य सरकार ने आनलाइन ग्रिवेंस रिड्रेसल सिस्टम बनाया है।
वहीं दूसरी तरफ़ इन दलीलों पर कोर्ट ने पूछा कि बिहार में कोरोना से कुल 12,090 मौतें दर्ज हुई हैं तो फिर सिर्फ 11,095 दावे ही क्यों प्राप्त हुए। लगता है कि राज्य सरकार ठीक से लोगों तक नहीं पहुंची। पीठ ने बिहार से कहा कि आप गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को देखें जहां दर्ज मौतों की संख्या से कहीं ज्यादा दावे आए हैं। मुखर्जी ने कम दावों के सवाल पर कहा कि उनके यहां कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान पाजिटिविटी दर बहुत कम रही। लेकिन जिनकी मौत हुई है, उनके परिजनों को मुआवजा मिलेगा।
वहीं याचिकाकर्ता गौरव बंसल ने कहा कि कम दावे आने का कारण है कि बिहार सरकार ने रिव्यू कमेटी गठित की है जो आने वाले दावों की स्क्रुटनिंग करती है, इस कारण दावे कम हैं। स्क्रुट¨नग कमेटी से रिव्यू कराए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि यह आदेश के खिलाफ है।
बता दें कि वहीं अभिनव मुखर्जी ने कहा कि ऐसा इसलिए है ताकि जिन दावों में कोई दस्तावेज आदि की कमी है, उसकी जांच करके उसे दूर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके राज्य में गरीब और अशिक्षित लोग भी ज्यादा हैं। इस दलील पर पीठ ने कहा कि अगर आपके राज्य की विशिष्ट स्थिति है तो आपको लोगों तक पहुंचने के प्रयास भी ज्यादा करने होंगे। कोर्ट मामले में चार फरवरी को फिर सुनवाई करेगा।