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गाज़ियाबाद : विदेशी महिला के नाम की फेसबुक प्रोफाइल बना ठगने वाले नाइजीरियाई गिरोह का हुआ पर्दाफाश।

गाज़ियाबाद : विदेशी महिला के नाम की फेसबुक प्रोफाइल बना ठगने वाले नाइजीरियाई गिरोह का हुआ पर्दाफाश।


गाज़ियाबाद। साइबर सेल ने विदेशी महिला के नाम पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर लोगों को चूना लगाने वाले नाइजीरियाई गिरोह का पर्दाफाश किया है। सरगना अका दिदीयर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने इनके ठिकाने से 32 डेबिट कार्ड, पांच मोबाइल, चार किरायेनामे, वीजा, पासपोर्ट, छह चेकबुक व दो पासबुक बरामद किए हैं। 

वहीं आरोपित महिला बन फेसबुक मैसेंजर पर लच्छेदार बातें कर लोगों को फंसाकर मोबाइल नंबर ले लेते हैं। फिर बड़ी रकम लेकर भारत आकर घूमने व शादी करने की बात कहते हैं। विश्वास दिलाने को भारत का टिकट भी कराते हैं और फिर भारत पहुंचने की तारीख पर एयरपोर्ट के कस्टम विभाग के नाम पर चिह्नित व्यक्ति को काल कर उक्त विदेशी महिला के जांच में फंसने की बात कहकर अलग-अलग खातों में पैसे जमा कराते हैं।

वहीं एसपी सिटी प्रथम निपुण अग्रवाल ने बताया कि अका दिदीयर के साथ गोरखपुर के चौरी चौरा बाजार निवासी अरविंद वर्मा और बलिया के सिकंदरपुर निवासी प्रिंस पांडेय को गिरफ्तार किया है। दोनों शाहबेरी में रहते थे और यहीं के रहने वाले प्रशांत व बबलू शर्मा फरार हैं। 

वहीं अका अप्रैल 2019 में छह माह के बिजनेस वीजा पर भारत आया था। आते ही उसने गिरोह बनाया और लोगों को ठगने लगा। वीजा खत्म होने के बाद न तो उसने इसकी अवधि बढ़वाई और न ही अपने देश लौटा। उसने दक्षिणी दिल्ली के कृष्णा पार्क-2 में किराये के फ्लैट में ठिकाना बना रखा है।

वहीं सीओ साइबर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि अका इस गिरोह का सरगना है, जिसने अपने अपने साथियों संग मिलकर बीते साल विजयनगर निवासी मधुरेंद्र से 6.80 लाख रुपये ठगे थे। जालसाज ने ब्रिटेन की महिला के नाम से प्रोफाइल बनाकर मधुरेंद्र से दोस्ती की और फिर कहा कि चार माह का वेतन 3.50 लाख पाउंड लेकर वह भारत घूमने आ रही है। 

वहीं इसके बाद कस्टम विभाग के अधिकारी के नाम पर फोन कर मधुरेंद्र को बताया गया कि 3.50 लाख पाउंड के डीडी की कस्टम ड्यूटी के नाम पर 65 हजार रुपये खाते में जमा करा लिए। इसी तरह येलो कार्ड, फ्लाइट टिकिट व अन्य बहानों से 6.80 लाख रुपये जमा करा लिए थे।

वहीं साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि प्रशांत के जरिए बाकी लोग अका से मिले। अका को दो साल पहले उत्तराखंड पुलिस और प्रशांत को बीते साल लखनऊ साइबर सेल ने गिरफ्तार किया था। बबलू फर्जी किरायेनामे बनवाकर अपने नाम से खाता खुलवाता है, जिसके लिए तीन हजार रुपये लेता है। अरविंद व प्रिंस इन खातों की पासबुक, चेकबुक व डेबिट कार्ड अका तक पहुंचाते हैं और इंटरनेट बैंकिंग खुद संभालते हैं। 

वहीं इसके एवज में दोनों खाते में आने वाली कुल रकम का सात प्रतिशत कमीशन लेते हैं। आरोपितों के 13 बैंक खातों को पुलिस ने फ्रीज कराया है, जिनमें छह माह के भीतर 90 लाख रुपये जमा कराए गए थे। फिलहाल इनमें 99 हजार रुपये हैं। 32 डेबिट कार्डों को भी पुलिस बैंकों के जरिए ट्रेस कर रही है। साइबर सेल के मुताबिक गिरोह ढाई साल में करीब एक हजार व्यक्तियों से कई करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।