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यूपी : वाराणसी में नमर्देश्वर शिवलिंग की हुईं स्थापना, वहीं रुद्र महायज्ञ में भाग लेने के लिए नेपाल से आये भक्त।
वाराणसी। वैसे तो काशी के कण कण में शिव विराजमान है लेकिन मंगलवार को गंगा पार डोमरी भी शिवमय हो गया। अवसर था 1008 नमर्देश्वर शिवलिंग के स्थापना का। हर हर महादेव के उद्धघोष के बीच 1008 नमर्देश्वर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो हर कोई भावसागर के इस विशाल समंदर में आस्था की डुबकी लगाने को आतुर हो उठा।
वहीं विश्वकल्याणर्थ एवं कोरोना जैसी घातक बीमारी के शमन के लिए काशी के गायघाट के सम्मुख गंगा नदी के पूर्वी छोर पर बसे डोमरी में आयोजित दस दिवसीय सीताराम नामजप रुद्रमहायज्ञ के दूसरे दिन वेद मंत्रों की पावन ध्वनियों एवं सम्पूर्ण विधि विधान पूर्वक यज्ञ स्थल पर बने दूसरे मंडप में शिवलिंग स्थापित किये गए।
वहीं सर्वप्रथम प्रातः मां गंगा का विधिवत पूजन किया गया ततपश्चात साहुपुरी स्थित वेदव्यास मंदिर में प्रातः स्मरणीय वेदव्यास जी का सविधि पूजन कर सीताराम जप रुद्रमहायज्ञ करने की अनुमति मांगी गई ।परम पूज्य संत तपोनिष्ठ आत्मानंद दास महात्यागी नेपाली बाबा के मार्ग दर्शन में पंडित धीरेंद्र मनीषी के आचार्यत्व मे चल रहे महायज्ञ के लिए मुंडन संस्कार संग कलश यात्रा के बाद मां गंगा के पावन तट पर निर्मित विशाल एवं भव्य यज्ञ मण्डप में 100 कुण्डों में पंचांग एवं वेदी का विधिवत पूजन अर्चन कर यज्ञ मण्डप में प्रवेश किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोचार के बीच नमर्देश्वर महादेव के 1008 शिवलिंगो की स्थापना की गयी। इसके पूर्व महायज्ञ के निमित्त 108 ब्राम्हणो का वरण कर वस्त्र, आसन, बर्तन, कम्बल आदि समर्पित किया गया ।
वहीं तदन्तर 1,100 सह यजमानों सहित मुख्य यजमान सत्यनारायण झुनझुनवाला को सपत्नीक मुकुट समर्पित किया गया। सभी यजमान देवराज इंद्र और महारानी इंद्राणी के रूप में हवन करेंगे। कार्यक्रम प्रारम्भ होने के पूर्व सभी यजमान साहुपूरी स्थित वेदव्यास मंदिर में स्थित स्वयंभू मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा, माँ गंगा, नर्मदेश्वर महादेव, सीता-रामचन्द्र आदि देवी देवताओं का विधिवत पूजन कर यज्ञ शुरू करने का प्रथम सोपान सम्पूर्ण किया गया।
वहीं इस अवसर तपोनिष्ठ संत पूज्य आत्मानंद दास महात्यागी (नेपाली बाबा) ने बताया कि बुधवार को प्रातः अरणी मंथन एवं हवन से यज्ञ का शुभारंभ होगा, जिसमे 1100 दंपति पुण्यलाभ लेंगे।
वहीं दूसरी ओर रुद्र महायज्ञ में भाग लेने के लिए हजारों की संख्या भक्त नेपाल से आये है। पण्डित धर्मेंद्र मनीषी ने बताया कि तीन हजार से अधिक भक्त तथा देश विदेश से आये भक्तों के लिए विशाल टेंट सिटी बनायी गई है । उनके लिए चाय जलपान, प्रसाद के लिए पांच स्थानो पर तथा अखंड भंडारे की व्यवस्था की गई है।
वहीं गायघाट,पंचगंगा घाट व अन्य घाटो से भी भक्तों के लिए यज्ञ स्थल पर आने हेतु नाव -बजड़े की व्यवस्था वाहनों के लिए पार्किंग,भक्तों के आवास व प्रसाद की व्यवस्था हेतु कार्यालय की स्थापना की गयी है साथ ही आवागमन हेतु वाहन व सुरक्षा की व्यवस्था उपलब्ध है।