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यूपी : वाराणसी में अब आचमन योग्य हुआ गंगाजल, वहीं 50 वर्ष पूर्व की स्थिति में पहुंचीं गंगा की निर्मल धारा।

यूपी : वाराणसी में अब आचमन योग्य हुआ गंगाजल, वहीं 50 वर्ष पूर्व की स्थिति में पहुंचीं गंगा की निर्मल धारा।


वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों के अनुसार गंगा की स्वच्छता के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों का प्रतिफल दिखने लगा है। मार्च महीने की शुरुआत से ही गंगाजल के प्रतिदिन लिए जाने वाले नमूनों को देखें तो जल का पीएच मान जहां निरंतर सुधार के साथ 15 मार्च तक 8.25 हो गया। 

वहीं घुलित आक्सीजन की मात्रा भी 8.2 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई है। बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) भी घटकर तीन तक पहुंच गई है। मार्च की शुरुआत से ही यह स्थिति बनी हुई है। जानकारों का कहना है गंगाजल की यह शुद्धता लगभग 50 वर्ष पूर्व की स्थिति में पहुंच रही है।

वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा रोज लिए जाने वाले अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो पीएच मान इस माह की शुरुआत से ही आठ के ऊपर बना हुआ है और इसमें लगातार सुधार हो रहा है। मीरजापुर में भी घुलित आक्सीजन की मात्रा 7.5 के आसपास है। यानी गंगाजल मध्य धार से उस पार तक आचमन और स्नान योग्य हो चुका है। घुलित आक्सीजन छह मिलीग्राम प्रति लीटर और पीएच मान 7.5 से अधिक होना चाहिए। बीओडी तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 

वहीं गंगा की स्वच्छता के लिए काम करने वाले पर्यावरणविद और बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी कहते हैं कि गंगा का जल 50 वर्ष पूर्व की स्थिति में पहुंच रहा है। अधिकांश नालों के बंद होने और सात एसटीपी लगा दिए जाने के बाद मध्य धार से उस पार तक पानी बिल्कुल स्वच्छ, पारदर्शी और मानकों पर पूरी तरह खरा हो चुका है। इसमें बेहिचक स्नान और आचमन किया जा सकता है। प्रो. त्रिपाठी के मुताबिक उन्होंने पहली बार 1972 में शोध में पाया था कि गंगा प्रदूषित हो रही हैं। सरकार के प्रयासों से इसमें सुधार दिखाई दे रहा है।

वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह बताते हैं कि पहले 30 नाले गंगा में गिरते थे। अब 24 नालों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। चार नाले आंशिक रूप से अभी प्रभावित कर रहे हैं तो उनके समेत दो नाले और टैप किए जाने हैं। 50 एमएलडी (मीट्रिक लीटर पर डे) क्षमता का रमना प्लांट, 10 एमएलडी का रामनगर प्लांट शुरू हो चुके हैैं। 25 एमएलडी का नगवा प्लांट बायो रेमिडेशन भी कर रहा है तो वहां जल में से प्लास्टिक छानने वाली मशीन लगा दी गई है।


1. जल शक्ति मंत्रालय का गठन और नमामि गंगे परियोजना के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन विभाग की निरंतर सक्रियता। 

2. घाटों की निरंतर साफ-सफाई, सुंदरीकरण, कूड़ेदान लगाना व लोगों में आई जागरूकता।

3. शहर के बाहरी क्षेत्रों में गंगा के तटीय इलाकों में पौधारोपण, प्रशासन की सतर्कता और मानीटरिंग। 

4. भेलूपुर और सारनाथ के बरईपुर में गंगा जल शोधित कर 80 व 100 एमएलडी पानी की आपूर्ति पहले से हो रही है।

5. भेलूपुर में स्थापित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता वृद्धि कर 100 एमएलडी तक पेयजल आपूर्ति पर कार्य हो रहा है।