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यूपी : मेरठ में 70 एकड़ जमीन और 361 करोड़ के बजट की होगी जरूरत हवाई उड़ान के लिए।
मेरठ। उड़ान की आशा में आठ साल गंवाने के बाद एएआइ और प्रदेश सरकार ने मेरठ की हवाई पट्टी के विस्तार और यहां से एटीआर 72 विमान उड़ाने की उम्मीद एक बार फिर से जगाई है। एएआइ की टीम ने दिसंबर में हवाई पट्टी का निरीक्षण करके प्रदेश सरकार को विस्तार का नया नक्शा सौंपा था।
वहीं इसे जिला प्रशासन ने मौके पर सुपर इंपोज करके जमीन का आकलन और उसका मूल्यांकन किया है। हवाई पट्टी विस्तार के लिए वन विभाग, एमडीए, सरकारी और निजी समेत कुल 70 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इसकी व्यवस्था करने में लगभग 361 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
वहीं मेरठ से उड़ान में सबसे बड़ी बाधा दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. (डायल) कंपनी से दिल्ली एयरपोर्ट के संचालन को लेकर हुआ अनुबंध बना था। अनुबंध के मुताबिक दिल्ली एयरपोर्ट से 100 किमी के रेडियस में कोई भी नया एयरपोर्ट नहीं बनेगा। यदि नया एयरपोर्ट बनेगा तो उसका संचालन करने की जिम्मेदारी डायल को देनी होगी।
वहीं मेरठ में डायल ने न तो संचालन करने की स्वीकृति दी थी और न ही अन्य कंपनी से अनुबंध करने के लिए अनापत्ति ही दी थी। हाल ही में डायल ने मेरठ में एयरपोर्ट का संचालन करने से इन्कार करते हुए प्रदेश सरकार को अपनी अनापत्ति दे दी थी।
वहीं इसके बाद प्रदेश सरकार ने मेरठ में एटीआर 72 (72 सीटर विमान) के संचालन की दिशा में काम शुरू किया है। एयरपोर्ट के संचालन का खर्च वहन करने के लिए यहां उड़ान प्रशिक्षण व अन्य कई गतिविधियां भी शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।
वहीं प्रदेश सरकार की मांग पर एएआइ (एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया) ने छह विशेषज्ञों की टीम भेजकर दिसंबर 2021 में यहां नए सिरे से एटीआर 72 के संचालन की संभावनाएं तलाशी थीं। निरीक्षण के बाद एएआइ ने एटीआर 72 के संचालन के लिए हवाई पट्टी के विस्तार का नया मानचित्र प्रदेश सरकार को सौंपा।
वहीं सरकार ने इस नए मानचित्र के मुताबिक भूमि की उपलब्धता और उसके लिए आवश्यक भूमि की खरीद के लिए आवश्यक धनराशि का विवरण मांगा था। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने नए मानचित्र को मौके पर उपलब्ध भूमि के खसरों पर सुपरइंपोज करके उसमें शामिल हो रहे गाटा का विवरण जुटाया है।
वहीं आकलन रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हवाई पट्टी विस्तार में पराग डेयरी की भी 12,070 वर्ग मीटर भूमि की जरूरत होगी। किसानों की 2,90,433 वर्ग मीटर जमीन लेनी होगी। इन जमीन का मूल्यांकन शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का दो गुण तथा ग्रामीण क्षेत्र में चार गुणा की दर से किया गया है।