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यूपी : वाराणसी में गंगा टाउन के लिए स्वच्छता का सर्वेक्षण हुआ पूरा, वहीं अब रुतबा बरकरार रखने की आई चुनौती।
वाराणसी। गंगा किनारे महाश्मशान मणिकर्णिका पर मसाने की होली खेली जा रही थी तो दूसरी ओर गंगा टाउन के लिए स्वच्छता का सर्वेक्षण हो रहा था। दिल्ली से आई सर्वे टीम ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में गंगा व किनारों के लिए किए स्वच्छता के प्रयास का मूल्यांकन कर रही थी।
वहीं नगर निगम प्रशासन को बिना बताए सीधे जनता से संवाद हो रहा था। दो दिनी दौरे में सर्वे टीम ने गंगा जल की निर्मलता, घाटों व किनारे के मोहल्लों की स्वच्छता पर टारगेट किया। साथ में नदी व किनारे की स्वच्छता को लेकर जन-जागरूकता का आकलन भी किया गया।
वहीं बीते वित्तीय वर्ष 2020-21 में गंगा टाउन सिटी की श्रेणी में वाराणसी को प्रथम स्थान मिला है। इस बार यह स्थान बरकरार रखने की चुनौती है। गंगा निर्मलीकरण को लेकर अंक कम नहीं होंगे लेकिन गंगा घाट की सफाई को लेकर कम अंक की आशंकाएं बनी हुई हैं।
वहीं क्योंकि बीते वर्ष गंगा में आई दो बार की बाढ़ में घाटों पर भारी मात्रा में मिट्टी जमा हो गई। एक निजी संस्था को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन कार्य की गुणवत्ता पर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, नमामि गंगे समेत कई स्वयंसेवी संस्थाएं नगर निगम से अनुबंधित कंपनी विशाल का बेहतर सहयोग कर रही हैं।
वहीं गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक 2525 किमी लंबाई के दायरे में बसे 150 शहरों में वाराणसी की प्रतियोगिता होगी। वाराणसी को प्रथम स्थान का गौरव यूं ही नहीं मिला। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गंगा निर्मलीकरण को लेकर सोच है तो स्थानीय जिम्मेदार अफसरों की कर्तव्यनिष्ठा। परिणाम, गंगा किनारे बसे शहर की स्वच्छता के लिए एक-एक कर मजबूत कदम बढ़े और वाराणसी के 84 घाट चमक उठे।
वहीं गंगा के किनारे बसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा निर्मलीकरण के तहत घाट व किनारे के हेरिटेज इलाके की सफाई का ब्लू प्रिंट वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। इसके तहत जहां नगर के सीवेज सिस्टम को आकार दिया गया तो घाट व हेरिटेज इलाके की सफाई की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दी गई।
वहीं 84 गंगा घाट यानी दक्षिण में आखिरी सामनेघाट तो उत्तर में खिड़किया घाट को दायरे में लाया गया। 20 प्रमुख घाटों पर दो शिफ्ट में 24 घंटे सातों दिन सफाई होती है यानी 8-8 घंटे के अंतराल पर तीन टीमों को लगाया गया है। इसमें सुबह व शाम एक-एक बार मुकम्मल सफाई होती है जबकि शेष समय कचरा दिखते ही साफ कर दिया जाता है।
बता दें कि वहीं डा. एनपी सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि गंगा टाउन सिटी के लिए होने वाले सर्वेक्षण के तहत दिल्ली से आई टीम ने दो दिन प्रवास कर यहां सर्वे किया है। घाट किनारे से लेकर पक्के महाल में सफाई व्यवस्था परखी है।