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महाकुंभ में बेच दी एक दिन में 1 लाख कप चाय, टीचर-स्टूडेंट का खतरनाक आइडिया, और वे बन गए करोड़पति...

महाकुंभ में बेच दी एक दिन में 1 लाख कप चाय, टीचर-स्टूडेंट का खतरनाक आइडिया, और वे बन गए करोड़पति...

प्रयागराज जिला, ब्यूरो। हर कोई जानता है कि भारत में चाय पसंद करने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। देश ही नहीं विदेश में भी लोगों को पता है कि भारतीय चाय के कितने बड़े प्रेमी हैं। चाहे कड़कड़ाती ठंड हो या चिलचिलाती धूप, चाय प्रेमी इसकी चुस्की लेने का कोई ना कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं। चाय प्रेमियों की वजह से ही आप चाहे देश के किसी भी हिस्से में चले जाएं, आपको चाय की दुकान नजर आ ही जाएगी। चाय वालों की कमाई भी लोगों को हैरान करती है। एक दिन में कई कप चाय बेच वो अच्छी-खासी इनकम बना लेते हैं।

चाय वालों के हुए बल्ले-बल्ले

प्रयागराज में 45 दिन चले महाकुंभ में जहां करोड़ों लोग अपने पाप धोने आए। वहीं कई ऐसे लोग भी हैं, जो यहां अपनी जीविका चलाने के लिए आए थे। यहां कई दुकान खोली गईं, जिसमें खाने-पीने की चीजें बेची जा रही थी। इसमें चाय वालों की संख्या सबसे ज्यादा थी। यह हर थोड़ी दूर पर चाय की टपरी थी। इस बीच, एक चाय बड़ी वायरल हो रही है। दरअसल, कुंभ मेले के दौरान 'चाय पॉइंट' नामक कंपनी को जबरदस्त सफलता मिली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपने लिमिटेड एडिशन स्टोर्स के जरिए एक दिन में एक लाख से ज्‍यादा कप चाय बेच डाली। इससे ब्रांड की लोकप्रियता में इजाफा हुआ।

अब चाय पॉइट का बड़ा एलान

खैर, एक दिन में 1 लाख कप चाय बेचना तभी मुमकिन है, जब चाय का स्वाद कुछ खास हो. चाय पॉइंट मशहूर चाय कैफे चेन है। मेले में जबरदस्त बिक्री के बाद अब इसके मालिक शेयर बाजार में अपनी जगह बनाने की तैयारी में हैं। चाय पॉइंट मई में आईपीओ लाने की योजना बना रही है। सह-संस्थापक तरुण खन्ना ने इसका एलान किया है। गौरतलब है, कंपनी में संस्थापकों, कर्मचारियों और शुरुआती एंजल इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। बाकी हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों के पास है। कंपनी फ़्रैंचाइजी मॉडल पर काम नहीं करती, बल्कि अपने स्टोर्स खोलती है। उसे विदेशों में भी आउटलेट खोलने के ऑफर मिले हैं, जिन पर भविष्य में फैसला लिया जा सकता है।

कोरोना महामारी के दौरान हुआ था नुकसान

बताया जा रहा, कंपनी का बिजनेस मॉडल फ्रैंचाइजी पर आधारित नहीं, बल्कि कंपनी के स्वामित्व वाला है। कोरोना महामारी के दौरान कंपनी को काफी नुकसान हुआ। लेकिन, अब वह वापसी कर रही है और विकास के रास्ते पर है। 'इंडिया रन्स ऑन चाय' के नारे के साथ चाय पॉइंट सिर्फ एक चाय कंपनी नहीं, बल्कि देश की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। टेक्नोलॉजी और परंपरा के मेल से कंपनी भारत के चाय अनुभव को नया रूप देना चाहती है।

ऐसे हुई शुरुआत

2009 में मुंबई के कैफे में चाय की चुस्कियों के दौरान हार्वर्ड के प्रोफेसर खन्ना और उनके छात्र अमूल्य सिंह बिजराल के दिमाग में यह आइडिया आया था। उनका मकसद लोगों तक अच्छी क्वालिटी की साफ-सुथरी और सस्ती चाय पहुंचाना था। उन्होंने मुंबई में व्‍यक्ति को देखा जो गंदे माहौल में प्लास्टिक के कप में चाय बेच रहा था। इससे उन्हें एक ऐसे ब्रांड को बनाने का आइडिया आया जो आम लोगों को अच्छी और साफ चाय सस्ते दामों पर दे सके और ऐसे विक्रेताओं के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा कर सके।

चाय पॉइंट ने अपना पहला आउटलेट 2010 में बेंगलुरु के कोरमंगला में खोला था। कंपनी की चाय बेंगलुरु वालों को इतनी पसंद आई कि खन्ना और सिंह ने इसे दूसरे शहरों तक पहुंचाने का फैसला लिया। अगले दो सालों में कंपनी ने दिल्ली, मुंबई और पुणे में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और वहां भी उसकी चाय हिट हो गई। आज, चाय पॉइंट के पूरे देश में 170 से ज्‍यादा स्टोर हैं। कंपनी की योजना अगले दो सालों में 300 अतिरिक्त स्टोर खोलने की है।