Headlines
Loading...
'एकता का महायज्ञ संपन्‍न140करोड़ देशवासियों की आस्‍था एक साथ',महाकुंभ समापन पर पीएम मोदी ने सबको भावुक कर दिया, रो पड़े...

'एकता का महायज्ञ संपन्‍न140करोड़ देशवासियों की आस्‍था एक साथ',महाकुंभ समापन पर पीएम मोदी ने सबको भावुक कर दिया, रो पड़े...

ब्यूरो, प्रयागराज। महाशिवरात्रि के स्नान के साथ ही 45 दिनों तक चले महाकुंभ का समापन हो गया है। 13 जनवरी को शाही स्नान से शुरू हुए आस्था के इस संगम में 67 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। यह मेला दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ के समापन पर अपने विचार व्यक्त किये हैं। जिसे पढ़कर लोग भावुक रहे।

गुलामी की मानसिकता ने तोड़ दी सारी जंजीरें

प्रधानमंत्री ने तस्वीरें शेयर कर सोशल मीडिया पर लिखा है कि महाकुंभ संपन्न हुआ। एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।

देश को जागृत किया

22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मैंने देवभक्ति से देशभक्ति की बात कही थी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे, बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे, और हमने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया। ये महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थी। 

तीर्थराज प्रयाग के इसी क्षेत्र में एकता, समरसता और प्रेम का पवित्र क्षेत्र श्रृंगवेरपुर भी है, जहां प्रभु श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। उनके मिलन का वो प्रसंग भी हमारे इतिहास में भक्ति और सद्भाव के संगम की तरह ही है। प्रयागराज का ये तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की वो प्रेरणा देता है।

हैरान है पूरी दुनिया

पीएम ने आगे लिखा है कि बीते 45 दिन, प्रतिदिन, मैंने देखा, कैसे देश के कोने-कोने से लाखों-लाख लोग संगम तट की ओर बढ़े जा रहे हैं। संगम पर स्नान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा। हर श्रद्धालु बस एक ही धुन में था- संगम में स्नान। मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी हर श्रद्धालु को उमंग, ऊर्जा और विश्वास के भाव से भर रही थी। 

आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है। पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, एक जुनून में लोग महाकुंभ चल पड़े…और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए।