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साइंस ने कर दिया कमाल, अब हर किसी के पास होगा सोने का महल, दुनिया से खत्म हो जाएगी अब कंगाली.. जानिए कैसे?...

साइंस ने कर दिया कमाल, अब हर किसी के पास होगा सोने का महल, दुनिया से खत्म हो जाएगी अब कंगाली.. जानिए कैसे?...

वैसे तो इंसान चांद-सितारों तक पहुंच गया है। वह अंतरिक्ष में घर बसा रहा है। बावजूद इसके दुनिया के वैज्ञानिक पूरी तरह अपनी धरती से जुड़े रहस्यों को सुलझाने में सफल नहीं हुए हैं। हमारी धरती के नीचे ऐसी-ऐसी दुर्लभ चीजें दबी हैं जो अगर इंसान की पहुंच में आ जाए तो हर किसी के लिए यह धरती स्वर्ग बन जाएगी। दुनिया और भी खूबसूरत बन जाएगी। इतनी धन संपदा आ जाएगी कि कोई भी व्यक्ति कंगाल नहीं रहेगा। दुनिया से गरीबी खत्म हो जाएगी।

जी हां, आप सही पढ़ रहे हैं। इसी दिशा में वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. दरअसल, इस दुनिया में एक सबसे कीमती धातू है सोना। सनातन परंपरा में यह एक सबसे पवित्र धातु है। इस एक धातु से दुनिया में अमीरी-गरीबी तय होती है। जिसके पास जितना सोना है वो उतना ही अमीर है। बावजूद इसके प्रकृति ने इस धातु की कोई कमी नहीं रखी है। हमारी धरती की गोद में करोड़ों-अरबों टन सोना दबा हुआ है। फिर आप सोच रहे होंगे कि सरकारें इसे निकालकर जनता में क्यों नहीं बांट देती।

सोना कहां है?

दरअसल, यहीं पर सारा पेंच फंसा हुआ है। ये सोना धरती की सतह और उसके केंद्र के बीच के हिस्से में दबा है। अभी तक इस सोने को निकालने के लिए कोई मशीन या तरीका नहीं बनाया जा सका था, लेकिन साइंस ने अब यह कमाल भी कर दिया है।

Eearth.com वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोना एक ऐसा धातु है जिसका एटम धरती की सतह से काफी नीचे पड़े हुए हैं। आमतौर पर सोना के एटम किसी अन्य एटम के साथ नहीं मिलते और इस कारण इनकी स्थिति जस की तस बरकरार है। दुनिया में जहां भी मौजूदा वक्त में सोने के खदान हैं वहां वे धरती की सतह में ही है। अब वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझा लिया है। उन्होंने एक मॉडल बनाया है जिससे धरती की कोख में पड़े सोने को धरती की सतह तक लाया जा सकता है।

वैज्ञानिकों की इस टीम का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के साइंटिस्ट एडम सिमॉन ने किया। उनके साथ चीन, स्वीटजरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया।

वैज्ञानिकों ने कैसे बयाना संभव

रिपोर्ट के मुताबिक धरती की सतह से कई किमी नीचे ये सोना दबे हुए हैं। इस जगह पर काफी भीषण दबाव और तापमान है। दुनिया के वैज्ञानिक सदियों से वहां मौजूद सोने के एटम को धरती की सतह तक लाने की योजना पर काम कर रहे थे। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह थी कि सोना आमतौर पर किसी अन्य धातु के साथ रिएक्ट नहीं करता है। नॉर्मल वातावरण में यह आज भी संभव नहीं है। लेकिन वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी के नीचे एक बेहद हाई टेम्परेचर में सोना के एटम को रिएक्ट करने पर मजबूर किया। इस कारण में उसके एटम में मूवमेंट देखा गया. इसके लिए वैज्ञानिकों ने सल्फर धातु का इस्तेमाल किया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती की सतह से 30 से 50 माइल नीचे पड़े सोने को सल्फर युक्त तरल पदार्थ से रिएक्ट करवाया गया। इस प्रक्रिया के तहत सोना के एटम अपनी जगह बदलते देखे गए। तरल पदार्थ और सोना धरती की सतह की ओर आने लगे। इसी एक्सपेरिमेंट के आधार पर वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि वह दिन दूर नहीं जब धरती की कोख में पड़े सोना का खनन किया जा सकेगा। हालांकि यह पूरा प्रयोग एक लैब में किया गया है। वास्तविक रूप में जमीन पर उतारने में इसमें काफी समय लग सकता है।