जानिए कैसे पुलिस को गच्चा दे रही है लेडी डॉन शाइस्ता परवीन, तो क्या? अब अतीक की बेगम का भी होगा 'एनकाउंटर'...
प्रयागराज जिला, ब्यूरो। काला चश्मा और शरीर पर बोरका… तो कभी पहनती है साड़ी के साथ ही मर्दाना कपड़ा। ऑन-बान और शान के साथ पुलिस के पहरे को गच्चा देकर कौशांबी से लेकर प्रयागराज की करती है सैर। भौकाली लेडी डॉन की सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहते हैं माफिया अतीक के दो शार्प शूटर। ननद और देवरानी के हाथों में भी थमाए हथियार। माफिया अतीक की बेगम भी कमर पर खोसकर चलती है पिस्टल। कांस्टेबल पिता से सीखी वर्दीधारियों से बचने के तौर तरीके। तभी तो पुलिस-यूपी एसटीएफ के हत्थे नहीं लग रही अतीक की खूबसूरत बीवी शाइस्ता परवीन।
असल में शाइस्ता परवीन की कहानी की शुरूआत उमेश पाल हत्याकांड के बाद से होती है। जब शाइस्ता अपने माफिया पति और शूटर बेटे के साथ मिलकर प्रयागराज के वकील उमेश पाल की हत्या करवा देती है। फिर क्या था सीएम योगी आदित्यनाथ दहाड़ते हैं और माफिया को मिट्टी में मिलाने की प्रतिज्ञा लेते हैं। सीएम की प्रतिज्ञा का असर भी दिखता है। शाइस्ता का सबसे छोटा बेटा असद यूपी एसटीएफ के साथ एनकाउंटर में मारा जाता है। फिर वह तारीख भी आ जाती है, जब तीन शूटर्स मिलकर शाइस्ता के पति अतीक और देवर अशरफ को गेम ओवर कर देते हैं। इतना ही नहीं पुलिस और यूपी एसटीएफ अतीक एंड बदमाश कंपनी का पूरी तरह से सफाया कर देती है।
अतीक का गैंग लगभग-लगभग खत्म सा हो जाता है। ऐसे में माफिया की खूबसूरत बेगम शाइस्ता आगे आती है और गैंग की बागडोर संभाल लेती है। पुलिस भी शातिर लेडी डॉन के सिर पर इनाम घोषित कर देती है। यूपी से लेकर बंगाल तक पुलिस की छापेमारी जारी रहती है पर लेडी डॉन शाइस्ता हाथ नहीं लगती। शाइस्ता अपनी ननद और देवरानी के साथ फरार चल रही है। पुलिस की कई टीमें तीनों की तलाश में दिनरात एक किए हुए हैं। इनसब के बीच वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी की एक किताब बाजार में आती है। जिसका नाम कसारी-मसारी है। इस किताब में शाइस्ता, गुड्डू मुस्लिम और अतीक अहमद के बारे में विस्तार से बताया गया है।
एक प्रोडकॉस्ट को दिए इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी ने बताया कि शाइस्ता के पिता यूपी पुलिस में कांस्टेबल थे। ऐसे में उसे पुलिस की हर गतिविधियों की पूरी जानकारी है। पुलिस से कैसे बचा जाए, उसके सारे तौर तरीके शाइस्ता को मालूम हैं। मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि, शाइस्ता की आखिरी बार लोकेशन कौशांबी में मिली थी। कछार के क्षेत्र में उसने अपना ठिकाना बनाया हुआ था। पुलिस को भी शाइस्ता के कछार में छिपे होने के इनपुट थे। मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि खुद पुलिस ही शाइस्ता को मिल्खा सिंह बनाए हुए है। जब भी पुलिस दबिश के लिए जाती है तो जोर-जोर से हॉर्न बजाती है। जिसके कारण शाइस्ता तत्काल अपना ठिकाना बदल लेती है।
मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि यूपी पुलिस शाइस्ता का एनकाउंटर नहीं करेगी। पुलिस उसे फिलहाल बख्शे हुए है। पुलिस शाइस्ता को सिर्फ दौड़ा रही है। मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं, अगर पुलिस चाहे तो शाइस्ता चंद घंटे के अंदर पकड़ी जा सकती है। पुलिस उसको एनकाउंटर में ढेर कर सकती है। पर सरकार की तरफ से अभी तक शाइस्ता को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि अतीक की तरह ही शाइस्ता के भी सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं से गहरी पैठ है। मनोज राजन त्रिपाठी कहते हैं कि अभी 2027 के चुनाव दूर हैं। कह सकते हैं कि अभी शाइस्ता उसकी ननद और देवरानी सिर्फ पुलिस का हॉन सुनकर भागती रहेंगी।
बता दें, शाइस्ता परवीन हेड कांस्टेबल फारुख की बेटी है। शादी से पहले वह अलग-अलग थानों के सरकारी क्वार्टर में रही है। उसकी परवरिश का ज्यादा हिस्सा प्रतापगढ़ में बीता। यहां भी पट्टी कोतवाली में फारुख का परिवार कई साल रहा है। यहीं रहते हुए शाइस्ता की अतीक से शादी हुई थी। वह थाने के क्वार्टर में पली बढ़ी है, हेड कांस्टेबल की बेटी है, इसलिए पुलिस के दांवपेंचों से अच्छी तरह वाकिफ है। कई बार ऐसा हुआ कि पुलिस ने किसी गांव में दबिश दी, पता चला कि शाइस्ता कुछ घंटे पहले ही निकल गई। वह लगातार अपनी रिहाइश बदल रही है। मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रही है। न ही वे अपने करीबियों से संपर्क में हैं। इसी कारण पुलिस उसे नहीं पकड़ पा रही है।
बता दें, दिसंबर 2024 में फरार माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन के बारे में पुलिस को अहम सुराग मिले थे। पुलिस ने अतीक के भांजे जका को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में जाका ने पुलिस को बताया था कि करीब सात माह पहले आखिरी बार मामी शाइस्ता परवीन से दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद वह कहां गई, वह नहीं जानता है। इसके अलावा वह अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और बहन नूरी के बारे में भी कुछ नहीं बता सका।
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