सरकारी जमीन पर लगाई गईं आंबेडकर और बुद्ध की मूर्ति हटवाने गई पुलिस पर हमला, कई पुलिसकर्मी जख्मी...
बुद्ध और आंबेडकर प्रतिमाएं हटाने गई पुलिस और राजस्व की टीम पर दबंगों ने शनिवार को हमला कर दिया। इस दौरान पुलिस के कई वाहन तोड़ डाले गए और पथराव में सात पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। उपद्रव बढ़ता देख एसडीएम ने पुलिसबल संग गांव में घुसकर छह लोगों को हिरासत में ले लिया। एसपी चक्रेश मिश्र ने बताया कि दस नामजद व सौ अज्ञात पर केस दर्ज किया गया है और एहतियातन गांव में पुलिसबल तैनात है।
पिसावां क्षेत्र के नेवादा प्रथम गांव के मजरा विभरापुर में होली से पहले सामुदायिक भवन के सामने खाली पड़ी भूमि पर बुद्ध और आंबेडकर की प्रतिमाएं स्थापित की गईं थीं। ग्रामीणों ने चंदा लगाकर बिना अनुमति के इनका निर्माण कराया था। इस पर संबंधित सचिव ने केस भी दर्ज कराया था। 13 मार्च को उपजिलाधिकारी महोली शशिबिंदु द्विवेदी, क्षेत्राधिकारी विकास गुप्ता व अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे थे और दोनों मूर्तियों को तिरपाल से ढकवा दिया था। इसके अलावा दिनेश, अंकित व अन्य के विरुद्ध पुलिस ने केस दर्ज किया था। वहीं, एसडीएम शशिबिंदु द्विवेदी ने ग्रामीणों को बताया कि बिना अनुमति के प्रतिमाओं को स्थापित कराया गया है। इसलिए तीन दिनों में इन्हें हटाया जाए।
तीन दिनों के नोटिस के बावजूद ग्रामीणों ने प्रतिमाओं को नहीं हटाया। करीब 22 दिन बाद स्थानीय प्रशासन शनिवार को प्रतिमाएं हटाने पहुंचा था। प्रतिमा हटाने के बाद लौट रहे काफिले पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। इसमें गांव की महिलाएं भी शामिल रहीं।छावनी में तब्दील हुआ विभरापुर गांव, उपद्रवियों की पहचान के प्रयास तेज
विभरापुर गांव में घटना के बाद सन्नाटा पसर गया। पुलिस लगातार आसपास के गांवों में भी गस्त करने में जुटी है। इसके साथ ही घटना को अंजाम देने वाले अन्य आरोपियों की भी तलाश तेज कर दी गई है। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने पहले ही इस घटनाक्रम को अंजाम देने की योजना बना ली थी। इसीलिए अब तक मूर्तियों को हटाया नहीं गया था। जबकि प्रशासन ने 13 मार्च को ही तीन दिन का अल्टीमेटम देकर मूर्तियों को हटाने के निर्देश दिए थे। बाइस दिन बाद शनिवार को समाधान दिवस में भी यह मुद्दा उठा था। इसके बाद ही यह पूरी घटना हुई।
गौरतलब है कि पिसावां के विभरापुर गांव में शनिवार को स्थानीय प्रशासन ने बिना अनुमति स्थापित प्रतिमाओं को हटवा दिया। इसके बाद ग्रामीण पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर हमलावर हो गए। अचानक हुए हमले से एसडीएम संग गए पुलिसकर्मी सकते में आ गए। ग्रामीणों की भीड़ से बचकर एसडीएम शशिबिंदु द्विवेदी विभरापुर गांव के बाहर आ गए। वहां एक स्थान पर रुककर उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराया। डीएम व एसपी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस बल गांव पहुंचा। इसके बाद से ही पुलिस की कई टुकड़ियां गांवों में गस्त कर रही हैं।
तो अचानक कहां से आ गए इतने पत्थर...
चर्चा है कि ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन के कुछ लोगों से ही इस कार्यवाही की भनक लग गई थी। ग्रामीणों ने इस हमले की तैयारी कर ली थी। यही वजह रही कि प्रशासन के वापस लौटते समय अचानक पथराव हो गया। पथराव करने वालों में महिलाएं भी शामिल रहीं। इसमें एक संगठन विशेष के कार्यकर्ताओं पर भी पुलिस को शक है। ऐसा माना जा रहा है कि ग्रामीणों को घटना अंजाम देने के लिए भड़काया गया है। हालांकि अब पुलिस की सख्ती के आगे ग्रामीणों के तेवर ढीले पड़ गए हैं। पुलिस उपद्रवियों पर सख्त कार्यवाही के मूड में हैं।