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वाराणसी: होटल मालिक को लाभ पहुंचाने में कई बड़े अफसरों ने खाई 'मलाई', सिर्फ JE पर हुई कार्रवाई...

वाराणसी: होटल मालिक को लाभ पहुंचाने में कई बड़े अफसरों ने खाई 'मलाई', सिर्फ JE पर हुई कार्रवाई...

जिला ब्यूरो, वाराणसी। नगरीय विद्युत वितरण खंड चतुर्थ (चेतमणि) क्षेत्र में निजी लाभ के लिए होटल मालिक को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध रूप से लगाए ट्रांसफार्मर में 'मलाई' तो कई अधिकारियों ने खाई, लेकिन मात्र जेई पर कार्रवाई कर मामले की लीपापोती की तैयार की गई है। बताया तो यह भी जा रहा है कि खंड के अधिकारियों को बचाने के लिए पूर्वांचल डिस्काम स्तर पर जबरदस्त सेटिंग हुई है। तभी तो इतने बड़े मामले में जमकर नियमों की धज्जिया उड़ाई गई। कारण कि ऊपर बैठे कुछ अधिकारियों की सह पर ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

खंड चतुर्थ क्षेत्र के विवेकानंदनपुरम में होटल में अवैध रूप से लगे इस ट्रांसफार्मर से आपूर्ति के बाद तीन माह से बकाया चल रहा था। जब इस भ्रष्टाचार का उजागर हुआ तो अब जाकर लगभग 65 हजार बकाए पर लाइन काटी गई है। वहीं आम उपभोक्ताओं हो तो महज पांच हजार बकाए पर ही कनेक्शन काट दिया जाता है।

लाइनमैन को उस गली से भी गुजरना मना था

सूत्रों का कहना है कि खंड के अधिकारियों की मनमानी इतनी बढ़ गई कि जिस क्षेत्र में अवैध रूप से ट्रांसफार्मर लगा है उस गली से किसी लाइनमैन को भी गुजरना मना था। ताकि पोल नहीं खुलने पाए। मामला उजागर होने पर फोटो खींचना भी मना कर दिया गया था हालांकि अब यह मामला शासन तक पहुंच गया है। ऐसे में मात्र जेई पर कार्रवाई दिखाकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्लान बना लिया गया है।
 
ट्रांसफार्मर लगाने के चक्कर में जेई नप गए। केसरी न्यूज 24 (सांकेतिक तस्वीर)

सूत्रों के अनुसार खंड के अधिकारी हर ऐसे काम डिस्काम के कुछ अधिकारियों के बल पर करते हैं। ताकि कोई विवाद हो तो ऊपर के अधिकारी बचा सके। इस मामले में नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता प्रमोद गोगानिया ने बताया कि जांच में क्षेत्र के जेई को दोषी माना गया है। जेई पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है।

यह है पूरा मामला

खंड चतुर्थ के विवेकानंदनपुरम नगवां में नवंबर 2021 में 25 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया। उस समय होटल की ओर से नौ किलोवाट का लोड लिया गया था। उस समय होटल निर्माणाधीन था। नवंबर-दिसंबर 2024 में होटल बनकर तैयार हो गया तो लोड लगभग 50 किलोवाट तक पहुंच गया। आरोप है कि विभागीय क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से बिना स्टीमेट पास कराए है अब 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है।

किसी संस्थान या प्रतिष्ठान के लिए ट्रांसफार्मर लगाने से पहले 15 प्रतिशत सुपरविजन चार्ज भी लगाना पड़ता है। साथ ही स्टीमेट पास कराकर बड़े ट्रांसफार्मर की कीमत भी जमा करनी होती है। आरोप है कि इस मामले में संबंधित खंड के कुछ अधिकारियों ने अवैध रूप से ट्रांसफार्मर लगान के लिए मोटी रकम भी ली है। तभी तो इस ट्रांसफार्मर से आपूर्ति भी चालू कर दी गई है।