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वाराणसी : संस्कृत विश्वविद्यालय ने छात्रों ने खटखटाया राजभवन का दरवाजा, आंदोलन करने की दी चेतावनी

वाराणसी : संस्कृत विश्वविद्यालय ने छात्रों ने खटखटाया राजभवन का दरवाजा, आंदोलन करने की दी चेतावनी

वाराणसी ।  संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। विश्वविद्यालय को शासन से प्रतिवर्ष 10.51 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है। वहीं शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन में विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष करीब 28 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। पाठ्यक्रमों का शुल्क विश्वविद्यालय का मुख्य निजी स्रोत है।

वहीं परंपरागत विषय होने के कारण शास्त्री-आचार्य में शुल्क काफी कम है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय ने शास्त्री-आचार्य के शुल्कों में 50 फीसद वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इसके लिए वित्त समिति की बैठक इसी माह में बुलाने की तैयारी है। दूसरी ओर इसकी भनक लगते ही छात्राें ने विरोध शुरू कर दिया है। छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण मोहन शुक्ल व महामंत्री शिवम चौबे ने इस संबंध में कुलपति कार्यालय को पत्रक दिया है। इसके अलावा राजभवन भी शिकायत करने का निर्णय लिया है।

छात्रों का कहना है कि संस्कृत को आधुनिक विषयाें से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। विश्वविद्यालय की स्थापना प्राच्य विद्या के संरक्षण व संबर्धन के लिए हुई है। यहीं कारण है कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को पहले शुल्क से अधिक छात्रवृत्ति मिलती थी। धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म हो गई। हालांकि विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में अब भी ज्यादातर छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से जुड़े हैं।

कोरोना काल में शासन ने जहां प्राथमिक से लगायत उच्च शिक्षा में शुल्क बढ़ाने पर रोक लगा दी है। बीएड पाठ्यक्रम में शुल्क की कटौती कर दी है। वहीं गत दिनों विश्वविद्यालय में संकायाध्यक्षों की बैठक में प्रमाणपत्रीय से लगायम शास्त्री-आचार्य तक के परीक्षा शुल्क करीब 50 फीसद तक बढ़ाने की सहमति बनी है। शास्त्री में 900 रुपये से बढ़ाकर 1410 रुपये तथा आचार्य का शुल्क 1100 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार अंकपत्र शुल्क, क्रीड़ा शुल्क, छात्रसंघ शुल्क को भी दाेगुना करने का निर्णय लिया गया है। छात्रों ने शुल्क बढ़ाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।